‘रात सुनती रही’ पुस्तक अमानवीय कामों को त्याग कर मानवता के सही संदर्भों की ओर इंगित करती, सावधान होने को चैत रही है, कह रही है। हर कहानी के पात्र का दर्द, कहानीकार के साथ समूचे विश्व का दर्द बनकर शब्दों की रूह में बैठकर पुकार रहा है हूक और कूक रहा है। रात ही सुनती है, क्योंकि रात के समय में ही हम अति संवेदना से भरे दिल, हृदय से गम्भीर होकर अच्छे बुरे की पहचान के काबिल होते हैं। ये रात ही होती है कि मानव को अमानवीय कृत्यों से किनारा करने का चिन्तनशील मौका देती है। चैतन्य सरोकारों से अवगत होने को मौका देती है आईये! हम मानवता का दर्द समझते, कहानियों के पात्रों के दर्द के हमनवा हों। और मानवता को अपना कर जड़ों से उखडऩे न दें। ताकि ये मानवता का शो$ख, चंचल, नाचता, गाता गुलमोहर जलती भुनती तपती दुपहरी में भी अपनी पूरी तन्मयता, पूरी आभा से चहक और टहक सके। और चिरंजीव रहे अनन्त, अनन्त कालों तक।
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Raat Sunati Rahi
Original price was: ₹150.00.₹100.00Current price is: ₹100.00.
Print length: 108 pages
Language: Hindi
Publisher: Bodhi Prakashan


